मुस्लमान, व्यक्ति जिसका मान मूसल जैसा हो

मुस्लमान, व्यक्ति जिसका मान मूसल जैसा हो |

हम सभी एक शब्द से परिचित है , जिसे मान कहा गया है | इसी मान के आगे ही,

  • स्वं के लिए स्वाभिमान , 
  • अभिषक के लिए अभिमान, 
  • समाज में संम्मान , 

जैसे पुरे शब्दों को बनाया गया है |

एक वस्तू विशेष को ओखली और मूसल कहा गया है |

ओखली, ओखल या खरल एक ऐसे मज़बूत कटोरे को कहते हैं जिसमें एक भारी मूसल नामक गदानुमा डंडे से चीज़ें तोड़ी और पीसी जाती हैं। ओखली और मूसल अक्सर सख़्त लकड़ी या पत्थर के बने होते हैं। पीसे जाने वाली चीज़ें ओखली में डाली जाती हैं और फिर उन्हें मूसल के प्रहार से तोड़ा या मूसल के साथ रौंदकर पीसा जाता है। इसका प्रयोग मसाले बनाने, चटनियाँ बनाने और औषधि पीसने में बहुत किया जाता है। कुछ ओखलियाँ बहुत बड़ी होती हैं और पारम्परिक समाजों में उसमें खाने के पदार्थ बनाने के लिए कई गृहणियाँ मिलकर भारी मूसल चलाती हैं। बहुत सी संस्कृतियों में इसका प्रयोग दवाईयाँ बनाने के लिए होने से इसे चिकित्सा या स्वास्थ्य का चिह्न भी माना जाता है। सुश्रुत और चरक जैसे प्राचीन चिकित्सकों के द्वारा प्रयोग किये जाने की वजह से इस आयुर्वेद का भी चिह्न माना जाता है।

ओखली और मूसल

मूसल वो विषय वास्तु है, जिसका एक प्रहार ही, काम को पूरा करने के लिया काफी है |

  • मै मूसल की जगह बोले जाने वाले शब्द को रखता हू | 
  • की एक बार जो शब्द मुख से निकल गया {बोल दिया}, ये संसार उसको पूरा कर देगा |
  • वो व्यक्ति, जिसका बोला हुआ शब्द मुसल जैसा है, और अपने बोले हुए शब्द पर स्वम को मान है |
  • उस व्यक्ति को मुसल - मान कहा गया है |
  • जोडकर बना - मुस्लमान

मुस्लमान शब्द हर उस व्यक्ति पर लागु है, जो स्वम अपने बोले हुए शब्द का मान रखता है | और विस्वास रखता है, की बोले जाने के बाद, श्रिस्टी उसको पूरा करेगी |

एसे व्यक्ति, जिसकी, जिव्वा पर हमेशा सरस्वती विदमान रहती है |