दान - समय श्रवण शब्द शारीर दूध अन्न मुद्रा पिंड

दान {donation} शब्द, व्यक्ति की अपनी स्वेछा से देने वाली उर्जा के लिया प्रयोग किया गया है |

दान देना तथा लेना दोनों को ही शुभ और पूण्य कार्य है |

संसार में हर विषय वस्तू उर्जा है | और इसी उर्जा को मूलभूत प्रकारों में बाटा गया है |

  1. समय {time}
  2. श्रवण {listening}
  3. शब्द {word}
  4. शारीर {body}
  5. दूध {milk}
  6. अन्न {grain|
  7. मुद्रा {currency}
  8. कर्म {task}

हर पल हम इन्ही में से कोई उर्जा दे रहे होते है या गह्रण कर रहे होते है |

व्यापार शब्द में भी इन्ही का आदान - प्रदान है, केवल व्यापार के साथ लाभ - हानि जुडा होता है |

इन के ऊपर पूरा लेख नीचे के पन्नो पैर है | यहा दान के सन्दर्भ में व्याख्या है |

इन्ही को दान सवरूप में अंकित किया गया है

  1. समय दान {समय, श्रम, उर्जा}
  2. श्रवण दान {सुनना}
  3. शब्द दान {आशीर्वाद, श्राप, शिक्षा, ज्ञान}
  4. कन्या दान {कन्या, खून, आख, गुर्दा, बाल, चर्बी, शरीर का कोई अंग}
  5. गो दान {गाय, बैल,बकरी, जानवर जो दूध की उस्त्पति करता हो}
  6. अन्न दान {भोजन} {धान, चावल, सब्जी, मसाले}
  7. मुद्रा दान {धन - सम्पदा, ज़मीन, मकान, सोना, चांदी और मुद्रा के सवरूप }
  8. पिंड दान {कर्म मोक्ष}

समय दान:

श्रवण दान:

शब्द दान:

शब्द {word} एक मूलभूत अस्तित्व है, जो अक्षरों से मिलके बनता है | संसार, इसी मुलभुत उर्जा के दयारा आपस में बात करता है | शब्दों का आदान प्रदान, हम वाणी तथा बिना वाणी के करते है | तथा सबसे छोटा शब्दमैहै जो सवम का सूचक है | 

हर शब्द के दो सवरूप है

  1. आशीर्वाद
  2. श्राप

 शब्द दान हम ऊपर दो सवरुपो में करते है |

  1. आशीर्वाद: मै खुश हू, खुश रहो, जीते रहो , सब अच्छा है , काम पूरा हो जायेगा - शव्द जो सकरात्मा उर्जा का संचार करता है
  2. श्राप: मै मारा जा रहा हू, गरीब हू, काम पूरा नहीं होगा  - शव्द जो नकारात्मा उर्जा का संचार करता है

{उर्जा एक मूलभूत पूरी है, उसके सकरात्मा - नकारात्मा  सवरुपो के बारे में पढ़े }

GOD, भगवान, मुस्लमान की समझ के बाद, मुझे पता है, सरस्वती जीवन के हर पल मेर जिव्वा पर विराजमान है, और मेरे स्वम पर निर्भर करता है, की मै किस स्वरूप का शब्द प्रयोग में लता हू |

 जो मै इस संसार को देता हू वो ही संसार मुझे वही वापस करता है | इसी प्रकार दुसरो को देने से ठीक पहले, मै वही उर्जा शब्द की रूप में स्वम को दे रहा होता हू |

कन्या दान:

शारीर {body}, मै एक उर्जा हू, जिसे जीव कहा गया है और मेरे बाहरी आवरण को शरीर कहा गया है |

इनसानी शारीर {human body}. body of bus, train coach कुछ उदहारण है |

मै {इंसानी रूप में} जब इस संसार में कर्म करने आया, तो मुझे एक शारीर दिया गया, जो, मेरे माता - पिता ने मिलकर ९ ३/४ महीने में बना कर दिया | जिसका इस्तेमाल करके मै आपने लिखवाये हुये कर्म कर रहा हू |

इसी जीवन रूपी यात्रा के दोरान, मेरे भी कर्म है, की मै भी इस संसार को एक शारीर बनाके दान करू | जो एक धन्वाद का प्रतिक है |

इसी दान को कन्या दान कहा गया है |

शारीर के दो सवरूप {लिंग} है, स्त्री - पुरुष , female - male, लड़का - लड़की, बालक - बालिका, जहा स्त्री सवरूप शरीर के पास एक नया शारीर बनाने की शक्ति है और पुरुष के निर्धारण में नये शारीर का सवरूप संकल्प होता है |

  1. स्त्री , female, लड़की , बालिका , युवती , बूढ़ी , देवी
  2. पुरुष , male, लड़का , बालक, युवक, बूढ़ा, देवता

एक जोड़ा {पति - पत्नी}, जब अपनी करनी के धन्यवाद सवरूप अपने द्वारा बनाये गएस्त्री शारीरको , एक पुरुष को सोपते है, उसस्वेछा सेअर्पित की जाने वालो प्रक्रिया कोकन्या दानकहते है |

ये प्रक्रिया शादी नामक कार्यक्रम में सम्पूर्ण होती है | जो उर्जा इसस्त्री शारीरको धारण करे हुई होती है उसको कन्या , दुल्हनके रूप में , तथा पुरुष जो इस सम्मान को गर्हण करता है, उसकोदूल्हाकहा गया है |

ये दान सुख की अनुभूति का सूचक है, जिसमे मैने अपना शारीरिक रूप का लेनदेन इस संसार के साथ पूरा किया |

 शारीर पञ्च तत्व का बना होता है, जिसे भ - ग - व - अ - न कहा गया है | भगवान् के बारे बे पढ़े |

गो दान:

दूध {milk} एक पाष्टिक तत्व रूपी है |

 

अन्न दान:

 

मुद्रा दान:

 

पिंड दान: